ढाई साल बाद भी काशीपुर के लोगों को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का इंतजार

अमृत मिशन के तहत निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ढाई वर्ष गुजर जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है जबकि इसे 18 माह के भीतर बन जाना चाहिए था। इसके लिए समय से धन अवमुक्त न हो पाना एक बड़ी वजह बताया जा रहा है। इसके अलावा नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित चार एसटीपी प्लांट के प्रस्ताव भी स्वीकृति की बाट जोह रहे हैं।

शहर से गुजरने वाली ढेला, गेबिया नदी, बहल्ला नाला समेत कई ऐसे नाले है, जिसमें घरों, फैक्टरियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सेफ्टी टैंक का पानी छोड़ा जाता है। इससे नदियों और नालों का पानी प्रदूषित हो रहा है। पर्यावरण के साथ जीव जंतु भी इससे प्रभावित हैं। नगर निगम ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए अमृत योजना में प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। वर्ष 2017 में इस प्रस्ताव को मंजूरी भी मिल गई। इसका टेंडर दिल्ली की एसएन एनवायरटेक कंपनी के नाम 35.38 करोड़ में हुआ।
18 एमएलडी के एसटीपी में लक्ष्मीपुर माइनर और कलश मंडप नाले के दूषित पानी के अलावा सेफ्टी टैंक के गंदे पानी का ट्रीटमेंट किया जाना है। यह प्लांट पेयजल निगम कार्यालय के पास निर्माणाधीन है। ट्रीटमेंट प्लांट का अनुबंध वर्ष 2017 में हुआ था। यह कार्य 18 माह में पूर्ण हो जाना चाहिए था लेकिन ढाई वर्ष की गुजर जाने के बाद भी प्लांट का काम आधा भी नहीं हो सका है। इस मद में राशि अवमुक्त न होना एसटीपी में देरी की बड़ी वजह बताई जा रही है। हालांकि देरी के लिए विभाग ने निर्माण कंपनी पर 70 लाख का जुर्माना भी डाला है।

जलनिगम के एई मधुकांत कोटियाल ने बताया कि वर्ष 2022 तक इसके पूर्ण होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पेयजल निगम ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत काशीपुर के लिए 137 करोड़ रुपये के प्रस्ताव तैयार किए है, जिससे दो बड़े और तीन छोटे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के साथ पूरे शहर के नालों को इन प्लांटों से जोड़ा जाना है। सहायक अभियंता मधुकांत कोटियाल ने बताया कि मोहल्ला अल्ली खां स्थित कर्बला के पास ढेला नदी में 10 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट प्रस्तावित है।
इसके लिए भूमि का चयन कर डीपीआर भेज दी है। इस पर 55 करोड़ लागत आने की संभावना है। इससे गेबिया, ढेला नदी का पानी शोधित किया जाएगा। वहीं जसपुरखुर्द में 1.5 एमएलडी और हेमपुर इस्माइल में 0.70 एमएलडी क्षमता के दो छोटे एसटीपी प्रस्तावित है। इन पर 28 करोड़ के व्यय का अनुमान है। इससे बहल्ला नदी एवं महादेव नहर का पानी ट्रीट किया जाएगा।
कोसी नदी के जल शोधन के लिए मुकंदपुर में 0.31 एमएलडी का छोटा प्लांट प्रस्तावित है, जबकि बाजपुर के खोखा नाले के प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए 41 करोड़ की लागत से 8.5 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट स्थापित किया जाएगा। इन सभी के रखरखाव की अवधि 15 वर्ष रहेगी।